यह सपना देखना जरुरी हैं l
धरती और धरती से जुड़ी हर चीज को,
बचाना जरुरी हैं l
धरती से मिलकर कर जो बसाया जहां,
उसे थामना जरुरी हैं l
जो उपभोग कर फेंक दिया,
उसे फिरसे उपयोग में लाना जरुरी हैं l
दर असल छीनकर भोगना,
भोगकर फेंकना...
इस प्रवृत्ति को हीमिटाना जरुरी हैं l
अब तो होते होते शाम हुई है,
दिन की दौड़ और धूप कम हुई है,
शाम की खूबसूरतीभी खत्म हुई है l
थका हुआ शरीर और हारा हुआ मन है,
चारों ओर निराशा का जाल है,
और सामने सिर्फ अंधेरी रात है l
इस रात के बाद का मंजर
खूबसूरत हो इस उम्मीद को लेकर
थोड़ा सुस्ताना जरुरी हैं l
हवा भी, झरने भी, पेड़ और पहाड़ भी
कीटकभी, पंछीभी,जानवर और इंसान भी
साथ जिए तो...
लंबा होगा दिन,अच्छाभी होगा दिन l
वर्ना रात लंबी,बहुत चिंताओसे भरी
और पश्चातापसे भरी हो सकती है l
आजके अनुभवसे यह समझना होगा,
इसी बात को समझाना जरुरी हैं l
फिर सुबह होगी इस उम्मीद को लेकर
यह सपना देखना जरुरी हैं l
यह सपना देखना जरुरी हैं l
Comments
Post a Comment