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Showing posts from January, 2024

मै अकेला ही चला था मगर अकेला ना रहा।

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मै अकेला ही चला था मगर अकेला ना रहा। कोई मिल गया जो दो कदम साथ चला, कोई मिल गया जो हरदम हमकदम रहा। दर्द अपने पराये कोई कह गया, कोई अपना ही रोना रोके चला गया। कोई मेरी बाते सुनकर चला गया , कोई अपना ही गाना सुना कर चला गया। "तू चलता रहे ,हम साथ है तेरे " यह इशारा साथ आ गया है। "तेरी नियत हम समझ गये पर  कुछ मजबूरिया भी है हमारी" यह भी कोई कह गया है। पेड, पौधे, हवा, पाणी, जमीन जरुरी है सबके लिये... आओ,साथ हो जाये हम सब उनके लिये। भूले थे रास्ता कभी अब सुधारणा जरुरी है ... खुद के लिये, आने वाली नस्लोंके लिये। इस बात को किसी ने भी नही नकारा, मे अकेला ही चला था मगर अकेला न रहा। कब मिलेगी मंजिल ... पता नही! पर अब  मंजिल का पता मेरे साथ है। उम्मीद का यह पलसफा साथ आया, मै अकेला ही चला था मगर मै अकेला न रहा। हम है,आप हो ,सब है एकही नांव में, डुबे तो साथ में, पार होंगे तोभी साथ मे। अब तक का साथ आपका अच्छा रहा, मै अकेला ही चला था मगर अकेला न रहा। अकेले चलने का होसला भी आप ही नही दिया था। जो हुआ ,जो किया  वह आपका ही दिया था। जो नही हो पाया उसमे खामीया होंगी मेरी , पर ...

मनिषा

श्वासांचा गंध तुझा मी घेऊन धुंद झालो , धावणारा मी सदा  थोडासा मंद झालो. ओघळणाऱ्या त्या बटांना  हलकेच बोटाने नीट कर ना, पाहून तिरपेच मजकडे स्मित कर अन् घायाळ कर ना. शब्द तुझे झेलण्याला कान हा अधीर झाला, नाद त्याचा, सूर त्याचा, भाव त्याचा मज घेऊ दे ना. त्या शब्दांचे गीत होतील त्यास मजला गावू दे ना, पैंजणाचे नाद ऐकून  अपसूक मना धावू दे ना. क्षण माझे सार्थ होती  अर्थ लाभे जीवना , दोन पावले मजसवे तू  हात हाती देऊन चाल ना. तू अग्निबाण माझे, मी उपग्रह आहे, कोठे नेऊन ठेवायचे, तुझ्याच हाती आहे. माता पिता प्रक्षेपण केंद्र, मित्र इंधन माझे , कर्तव्यात सदा रहावे , मनिषा एवढीच आहे.

यकीन

आज का दिन अच्छा होगा यकीन  है हमको। हम अच्छे है, सब अच्छे है, यकीन है हमको।। संकट जो भी आयेंगे पांवो तले दबा देंगे। पावों मे है कितनी ताकत यकीन है हमको।। तुफां जोभी आयेंगे उनको चीरके चल देंगे। सिने मे है कितनी हिम्मत, यकीन है हमको।। पहाड-पौधे जीव-जंतू, यही तो है सब अपने। इनकेबिना हम हो नही सकते यकीन है हमको।। (वैद्य मनोज पाटील सांगली, 4जनवरी 2020)

निरंतर

पापा काकांची प्रेरणादायी आठवण सदैव आपल्या मनात जिवंत राहू दे! कार्यकर्त्याला सदैव प्रोत्साहन देणारे काका,पर्यावरणाच्या कामासाठी सदैव उत्साही असणारे काका,नेहमी सकारात्मक ऊर्जा देणारे काका,सरकारची भांडणारे आणि सरकारला सहयोग करणारे काका,त्यांना भेटलेले क्षण न क्षण सदैव प्रेरणा देणारे आहेत.        त्यांचा सहवास हवाहवासा वाटे,पुन्हा पुन्हा मिळावा असे वाटे, परंतु प्रकृती अस्वास्थ्यामुळे गेल्या दोन वर्षांमध्ये त्यांना त्रास द्यायलाही नको असे वाटे.माझ्यासारख्या असंख्य कार्यकर्त्यांना काकांची आठवण सदैव कार्यक्षम ठेवेल .काहीतरी  निमित्ताने आपण सर्वजण वारंवार भेटत राहू .काकांची आठवण काढत राहू. पर्यावरणाचे काम करत राहू.अशी श्रद्धांजली आपण त्यांना सदैव देत राहू... आसमान में सितारे कई हैं, चमकते बुझते हुये ,ये 'रातों' को सवारते हैं। मिलना-बिछड़ना, यही तो सिख है, पर सचमुच खास है वे लोग जिनकी वजह से 'रिश्ते' जुडते जाते है । रिस्ते तो बनते बिगडते है, पर सचमुच खास है वे लोग जो सबको 'प्रकृती' से जोडते जाते हैं । प्रकृती तो मां है हमारी हमारे पुरखे,आनेवाली पिढी निरंतरसे जो जुडे वे ...