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Showing posts from November, 2024

लिखना

जब से मैने कुछ लिखने का सोचा है, जो भी सामने आता है, पढने लग जाता हूँll धृ ll अब तो कुछ भी पढ सकता हु आढा तेढा तिरछा छोटा बडा l साहित्य के सागर में कितने सारे मोती पा लेता हूं ll1ll दुनिया को देखना गौर से  पहले भी होता था,अब भी होता है l निर्माण की प्रक्रिया को, सीधा भाप लेता हूं ll2ll  भविष्य के सोच मे पहले तो, चिंता जादा होती थी l अब समस्या को सुलझाने का,रास्ता ढुंड लेता हूं ll3ll

शेरो शायरी

खूबसूरती... दिल की खूबसूरती भी अंदाजसे  अंग अंग में झलकती है l जब दिल में मोहब्बत महकती है  खूबसूरती और भी निखरती है l फूलों को नुमाईश की जरूरत नही पडती वो यूं ही खूबसूरत लगते है l  ओसकी बुंदे हो या, भवरे हो पास में तो , वो और भी खूबसूरत लगते है l  बुढापे में ऐसा ही फार्मूला हो.... जो भी सामने दिखता है, देखने आना चाहिये l  उसे "अच्छा" या "बुरा" क्यू कर कहे? "समय बदलता है", ये भूलना नही चाहिये l जो भी करना आवश्यक है और कर सकते है,  करने आना चाहिए l बुढापा ऐसा होना चाहिये, जो नही करना है, वो नही करना चाहिए l  तजूरबा जिंदगी का बहुत है मगर, सलाह पुछी नही तो,देना नही चाहिये l साधन तो बहुत जुटा रखते है मगर, मदद मांगी नही,तो देना नही चाहिये l सामने वाला कितना भी अपना हो, बुढापेमें ऐसा ही फार्मूला होना चाहिये l  तकलूफ... पत्तों के बीचभी काटो की चुभन हो सकती है फुल भी कभी कभी महकने से कतराते है l  कुछ दोस्त होते है जो जादा ही तकलूफ करते है और कुछ बेशरम हक से तकलीफ देते है l  मदद... किसी की मदद करो तो, इतनी आनंद से मदद करो l  की मदद लेने वाले...

मानस

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तेजपुंज तेजसा मनकवड्या माणसा धर्म ध्वज राजसा सूर्य जसा तू तसा. तेज आहे ताप नाही  चंद्र आहे डाग नाही  चंद्रगुप्त चक्रवर्तीचा  चक्र जसा तू तसा! देश धन्य तुझ्यामुळे धर्म धन्य तुझ्यामुळे  ज्ञानवंत कुलवंत चारित्र्याचा आरसा! वृक्ष तू,पहाड तू सावली सुशांत तू  नाही अंत, रत्न अनंत समुद्र जसा तू तसा!

नोव्हेंबर 2024... निवडणूक काळातील दोन कविता.

1. कुछ लोग होते है,कभी कुछ मांगते नही, बस देने की कोशिश मे रहते है l  वो लोक होते है जो, कुछभी दिखाते नही, हमेशा करने की कोशिश मे रहते है l  कुछ लोग होते हैं जो देख लेते हैं,क्या करने से मशहूर होते हैं, वही कम काम करनेवाले, दिखाने में लग जाते हैं और मशहूर हो जाते हैं l  दुनिया में कुछ भला होता है तो वह उन लोगों से होता है जो करते ज्यादा और दिखाते कम है l  और मशहूर वह लोग होते हैं जो काम करते कम हैं और दिखाते ज्यादा है l  वो जानते नही जो मशहूर होते है, जो मशहूर नही,वह कैसे खुश रहते है? मशहूर होकर वो कितनी खुशी पाते है? मशहूर न होकर हम कौनसी खुशी पाते है l  2. हल्ली काँग्रेसच्या कार्यक्रमात  मा बाळासाहेब ठाकरे यांचा फोटो लागतो. भाजपाच्या बॅनरवर सुद्धा  मा अजित पवारांचा फोटो असतो. अशी सगळी सरमिसळ बघून एका अर्थाने बरे  वाटते. देशभक्त समाजनिष्ठ कार्यकर्ता असाच विचार करत असतो... फक्त देशासाठी, समाजासाठी अन मातीसाठी!  तरी खूप लोक असतात जे विचार करतात केवळ धर्मासाठी आणि जातीसाठी. सगळं दिसतंय,पण कळत नाही.  कळतय, पण वळत नाही. मातीचा विचार करण...