जानीये और मानीए
कृपया, जानिए और मानिए! प्रस्तावना:- बीस पचीस वर्ष की वैद्यकीय सेवा के बाद नीचे की दो लाइने कहने में मुझे थोड़ा भी संकोच नहीं होता। "ओल्ड इस गोल्ड" और "स्मॉल इस ब्यूटीफुल"! यह दो वाक्य मैं अपनी वैद्यकीय सेवा के संबंध में कह रहा हूं। यह कहते समय मेरा अभिप्राय बिल्कुल ऐसा नहीं है कि ,जो नया है पूरा का पूरा कोयला है और जो कुछ भी बड़ा है वह सारा का सारा अनावश्यक है। आज हमारे आसपास बड़े-बड़े अस्पताल बनते दिखाई पड़ रहे हैं। इन बड़े-बड़े अस्पतालों में बड़ी-बड़ी मशीनरी लगी हुई है। वहां पर बड़े-बड़े डॉक्टर आकर अपनी सेवा दे रहे हैं। वहां पर नौकरी करने वाले हर व्यक्ति को अच्छी पगार भी मिलती होगी। जो मशीनरी और टेक्नोलॉजी वहां पर लगी है ,उसकी मरम्मत मेंटेनेंस भी खूब होती होगी । सब कुछ पैसों के आधार पर ही हो रहा होगा। स्वाभाविकतः यह पैसा मरीजों के इलाज से जो पैसा आता है वहीं से खर्च होता होगा। यहां पर जितना पैसा लगता है, उतना देने की क्षमता हमारे देश में बहुत सारे लोगों में आ गई है, यह हमारे देश के विकास का एक '...