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प्रज्ञाक्षेपण

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मुखपृष्ठाविषयी :-     पालक शिक्षक प्रबोधनातून या शाळेमध्ये जे घडले ते प्रक्षेपण केंद्राप्रमाणे आहे. या प्रक्षेपणाबरोबर मुले विकासाची शक्ती घेवून कर्तृत्वाच्या आकाशात झेप घेत आहेत. त्याचवेळी भ्रष्टाचार, गुन्हेगारी, फुटीरता आदी दोष निष्प्रभ होत आहेत. म्हणून या पुस्तकाचे नांव सुध्दा 'प्रज्ञा-क्षेपण'. - डॉ. मनोजकुमार आ. पाटील बी.एस्सी, (फिजिक्स) बी.ए.एम्.एस्.  

दो मिनट

पत्रकारों की भरी परिषद में प्रशासक आए थे l  कुल दो विषयों का एजेंडा लेकर आए थे l  प्रॉपर्टी और पैसे की बात तो हो गई घंटाभर, पर्यावरण की सेवा की बारी आई  तो कह दिया," बस दो मिनट l " उस सेवक को तो कुछ भी नहीं चाहिए था,  दो मिनट भी नहीं l  प्रशासक ही बोल देते गंभीरता से तो चल जाता  बस,दो मिनट! उपक्रम के उद्देश्य की सफलता की चिंता थी, इसलिए सेवक ने सब सह लिया चुपचाप l  बिना पगार के समय,खून और पसीना देता था उसका आदर भी नहीं हुआ दो मिनट! ऊपर से यह बताया गया...  प्रॉपर्टी पैसों के विषय को ही महत्व दो l उन्होंने भी ऐसा ही किया, दूसरे दिन समाचार पत्रों में दो लाइन भी नहीं दिखी l  किसी ने भी जराभी नहीं सोचा,दो मिनट! कवि की गुजारिश है... आप अब तो सोचो दो मिनट l  वक्त अगर निकल गया और लाख बार भी दोगे, तो भी काम ना आएंगे दो मिनट l  यह एक संकेत भी है, एक संदेश भी है,. अपनेआप के लिए l  कितना महत्व है हमें  प्रकृति की बात के लिए l  जिसका कण कण और क्षण क्षण  जीता और मारता है बस  हम और आपके लिए l ऐसे कृतघ्न कैसे हो गए  हम...