gajal (गैरतवाले)
गझल ------- कोई अपने कौम के झंडे लहरा रहे है शानसे कोई प्यासों की प्यास बुझानेमें दिनरात लगे हैं। जाति की राजनीति कोई चमकाए बेशर्मीसे कोई तिरंगे की शान में अपनी जान दे रहे है। जरूरत से ज्यादा किसी ने खोदा है जमीन को जमींकी सुरक्षा में कोई अपनी नींद उडा रहा है । दिल बहलाने के लिए कोई मौत का खेल खेलें उसीको बचाने कोई अपनी जिंदगी खपा रहा है । कोई बर्बाद कर रहा है अपने हातो सारा जहां कोई ये जहां बचाने को बेइन्तीहा बेकरार है । बरबाद करनेवालोंकाही आज क्यूं बोलबाला है बचानेवालों से खबरवालेभी सदा बेखबर है। जो लूटते है सभीको उसीपे लूटाते मोहब्बत अपनी चुपचाप मोहब्बत करनेवालें खुद को लुटा रहे है। बेवफा है बादशाहा बेगैरत है उसके मुलाजिम गैरतवाले सोच में पड़े हैं,आजकल सही क्या है? वैद्य मनोज पाटील 16/08/2021