विवाह का दृष्टीकोण

दो दो उंची उंचे मिनारो को
लेकर क्या करना है?
हमे तो एक वैभवशाली 
शिखर का निर्माण करना है l

मकान को बनाना आसान है,
और कुछ है तक नुकसान भी l
हमे तो हर घर को
एक पवित्र मंदिरसा बनाना है l 

एक दुसरे के सुख दुख मे साथ दे सके 
एक दुसरे के उन्नती में सहाय्यक हो
व्यक्ति का विकास भी इसलिये
की परिवार का विकास करना है l 

देह की चिंता, भोगकी लालसा
यह तो पशुओं की विशेषता है l
"प्रदर्शन" और "प्रतिस्पर्धी" मे न पडकर
"प्रगती" की और अग्रेसर होना है l 

बच्चे पैदा करे या ना करे
यह प्रश्न ही नही है भाई!
जो पैदा हो गये उनके 
विकास का विचार करना है l

सारे सुख बच्चो को मिले
यह भावना तो ठीक है...
सारी शक्तियों से संपन्न वो बने
हर अंग से विकसित करना है l 

हर व्यक्ती स्वधर्म के लिए जिये
हर दुसरे घटक का सन्मान करे l 
स्वयंशासन स्वावलंबन का आधार हो
कानूनों की क्या आवश्यकता है?

बच्चे और बुढो का पालन घर में 
आदर और आनंद से होता रहे 
अनाथालय और वृद्धाश्रम की 
हमको क्यों आवश्यकता है?

सिर्फ व्यक्ति की ही नही
पशु और प्राणी की भी चिंता करे l 
किट और मकोडो की ही नही
मिट्टी और पानी की भी चिंता करे l 

विवाह एक बंधन है तो बंधन सही
उन्नत विकास का एक साधन बने l
उंची उंची उडान के बाद 
विश्राम का एक आंगन बने l

हमे तो आज को भी और
कल को भी खूबसूरत बनाना है l
बधाई उस हर विवाह की
जो स्वधर्म निर्वाहका बहाना है l☘️



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