लिखना
जब से मैने कुछ लिखने का सोचा है,
जो भी सामने आता है, पढने लग जाता हूँll धृ ll
अब तो कुछ भी पढ सकता हु
आढा तेढा तिरछा छोटा बडा l
साहित्य के सागर में कितने सारे मोती पा लेता हूं ll1ll
दुनिया को देखना गौर से
पहले भी होता था,अब भी होता है l
निर्माण की प्रक्रिया को, सीधा भाप लेता हूं ll2ll
भविष्य के सोच मे पहले तो,
चिंता जादा होती थी l
अब समस्या को सुलझाने का,रास्ता ढुंड लेता हूं ll3ll
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