खिलाडी


खिलाडी

खिलाडी जब भी गिरता ,है वह एक खेल होता है।
अनाडी जब भी गिरता है ,वह हादसा हो जाता है।
हादसा भी "खेल" हो सकता है, बशर्ते...
गिरने वाला "खिलाडी' होना चाहिए।

दु:ख -सुख,हार-जीत तो आते रहते है जिंदगी में।
कोई रोता ही रहता है, कोई हंस के निकल जाता है।
जीवन भी खेलसा हो सकता है, बशर्ते...
जिने वाला खिलाडी होना चाहिए ।

कडवी बात कभी 'सीख' देती है, कभी चिढा देती है।
मिठी बातभी कभी "मरहम" होती है या फंसा देती है।
हर बातका एक "खेल" हो सकता है बशर्ते...
सुनने वाला " खिलाडी" होना चाहिए।

कभी कोई मिल जाता ,है या कोई खो जाता है।
हर वक्त आना जाना लगा रहता है जगत में।
सफर का मजा तो आ सकता है, बशर्ते...
आदमी को "मुसाफिर"जैसा होना चाहिए।

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