18 फेब्रुवारी 2024 -दो कवितांए
1.
ले दे के कुछ सांसे बची है ,कुछ बीत गई।
उन सांसों में...
कितनी जिंदगी? कितनी मौतें?
हिसाब लगाने का दिन...जनमदिन!
कितने सांसों ने पैदा की खुशी
कितनो ने गम पैदा किया।
सिर्फ अपने लिए कितना सोचा
कितनों से मन जुड गया ?
कई जिंदगीयों से जुड़कर
बीतती है अपनी जिंदगी।
कतरे कतरे ने पैदा किया ,
हमको पालापोसा बड़ा किया ।
हमने कितनों की हिफाजत की ?
कितनों को मार दिया ?
हिसाब लगाने का दिन... जनमदिन।
सांसोंकी ताकत ,शब्दोंकी ताकत
बाहोंकी ताकत, भावनाओंकी ताकत ..
कितनों को बचाने मे काम आयी?
कितनी व्यर्थ चली गई ?
कितनी आखोमें आयी खुशी
कितनी आंखे नम हुई?
...हिसाब लगाने का दिन... जनमदिन।
आनेवाले लम्हों में ...
वह कितने भी हो... कम या जादा ,
भरपूर जिंदगी जीने का, जिंदगी देने का
खुशिया पाने का, खुशिया बाटने का,
सिलसिला बना रहे ।
एक यादगार मौत की ख्वाईश में ,
...हिसाब लगाने का दिन... जनम दिन।
2.
जैन जगत का ध्रुवतारा...
परमपूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी
महाराज की समाधी हुई।
हजारो लाखो घरमें आज
शोक का माहोल होगा।
आत्मकल्याण एवं जगतकल्याण के लिए बीता
उनका जीवन, वह जीवन ही उनका संदेश होगा।
यदि शोक का प्रदर्शन हुआ तो उनकी
साधना और संदेश अपमान होगा।
नश्वर देह का त्याग हुआ है, उसे अग्नी मे समर्पित करना होगा। पर उसकी स्थिती से पता चलता है,
उनकी जीवन चर्या और समाधी मरण
कितना व्यवस्थित हुआ होगा।
जिन शासन की पताका उन्होने फहराई अबतक
अब हमे उसे अपने हात मे लेना होगा।
हर जीव का जीवन सार्थक हो, इसीमें उनके उज्वल
ज्ञान, दर्शन ,चारित्र्य का होना सार्थक होगा।
(18 फेब्रुवारी 2024 -दो कवितांए)
( जन्मदिन के उपलक्ष में "धन्यवाद" की भावना बढी रहती है। माता-पिता ने हमे जन्म दिया। हवा, पाणी ,पेड ,पौधे, जीव ,जंतू, खेती, किसान और जवानों ने हमारा जीवन सुरक्षित किया। ज्ञान और विज्ञान ने उसको विकसित किया । रिश्तेदारो और मित्रो ने उसे आनंदित किया। सबके धन्यवाद का चलन चलता है।)
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