मै अकेला ही चला था मगर अकेला ना रहा।


मै अकेला ही चला था मगर अकेला ना रहा।

कोई मिल गया जो दो कदम साथ चला,
कोई मिल गया जो हरदम हमकदम रहा।

दर्द अपने पराये कोई कह गया,
कोई अपना ही रोना रोके चला गया।
कोई मेरी बाते सुनकर चला गया ,
कोई अपना ही गाना सुना कर चला गया।

"तू चलता रहे ,हम साथ है तेरे "
यह इशारा साथ आ गया है।
"तेरी नियत हम समझ गये पर 
कुछ मजबूरिया भी है हमारी"
यह भी कोई कह गया है।
पेड, पौधे, हवा, पाणी, जमीन
जरुरी है सबके लिये...
आओ,साथ हो जाये हम सब उनके लिये।
भूले थे रास्ता कभी
अब सुधारणा जरुरी है ...
खुद के लिये, आने वाली नस्लोंके लिये।
इस बात को किसी ने भी नही नकारा,
मे अकेला ही चला था मगर अकेला न रहा।

कब मिलेगी मंजिल ... पता नही!
पर अब  मंजिल का पता मेरे साथ है।
उम्मीद का यह पलसफा साथ आया,
मै अकेला ही चला था मगर मै अकेला न रहा।

हम है,आप हो ,सब है एकही नांव में,
डुबे तो साथ में, पार होंगे तोभी साथ मे।
अब तक का साथ आपका अच्छा रहा,
मै अकेला ही चला था मगर अकेला न रहा।

अकेले चलने का होसला भी
आप ही नही दिया था।
जो हुआ ,जो किया 
वह आपका ही दिया था।
जो नही हो पाया
उसमे खामीया होंगी मेरी ,
पर "देर सवेर होगा जरूर!"
यह विश्वास भी आप ही ने दिया।
मै अकेला ही चला था मगर अकेला न रहा।

Comments