जो महसूस हो रहा है..।

नजर के सामने जो नज़ारे हैं 
उन्हें देखकर महसूस होता है
अब जीने के तरीके बदलने होंगे।
बड़े-बड़े अस्पतालों में जाकर 
जिंदगी की सारी कमाई लुट जाती है 
हमें मरने के तरीके बदलने होंगे।

धरती को लूटा है बेतहाशा अब तक
आनेवाली नस्लोंकी जिंदगी बेहाल है 
अब जिंदगी के तरीके बदलने होंगे।
एहतियात के लिए बने इंतेजामात
और मजहब में दलाल बढ़ गए हैं  
अब बंदगी के तरीके बदलने होंगे।

नई दुनिया के नए साधन नई सोच 
नागुजीर है पुराने लोगों के लिए 
क्या पुराने तजुर्बे अब भूलने होंगे ?
कोई सुनने को तैयार नहीं आजकल
अक्ल कम दूरियां ज्यादा बढ़ रही हैं
अब कहने के तरीके बदलने होंगे।

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