आज तो हम इजराइल के साथ है।

गाझा के लोग कहते है," हम भी इन्सान है"
हम भी उनके लिए पूरी हमदर्दी रखते हैं।
पर..."वे बिल्कुल 'बेकसूर' नहीं"
यह भी हम मानते हैं।

"गलती हमास की है ,
सजा जनताको मिल रही है"
ऐसा रोना रोने वालों की
बड़ी दुकाने चलती है।
हमास जैसी बर्बरता को 
माफ नहीं कर सकते।
ऐसी फितरत ही ना पनपे दुनिया में,
ऐसी कोशिश क्युं न कर सकते ?

जिम्मेदारी सब पर आती है...
हमारे समाज में।
कौन सी भावना बढे
कौन से विचार चलने दे
किसके पीछे हम चले
किसको हम रोके...
इसके लिए 'जिम्मेदार' क्या वो नहीं हैं?

किसको हम कितना सहे...
किसका हम विरोध करें ?
किसका करें तुष्टिकरण...
किसका करें पुष्टिकरण?
इसके लिए 'अधिकार' क्या हमें नहीं है?

आनेवाली पिढीयो को हम कैसी दुनिया दे ,
कैसे विचार दे ...कैसी प्रक्रिया दें?
जो उनका जीवन सुलभ करें या 
उनको संकट में धकेल दे?
उन्नति करें सबकी सब मिलकर,
या ऐसे ही दिन उन्हें देखने को मिले?

सोच और विचार कर,
"इसराइल को हम आज तो साथ देंगे ।"
क्योंकि...
हम आतंकवाद नहीं चाहते
हम वैश्यीपन नहीं देखना चाहते
हम रक्तपात नहीं सहना चाहते।

किसी पर आक्रमण करें 
यह हमारा इतिहास नहीं रहा ।
स्वयंरक्षण के लिए सिद्ध हो ,
ऐसा आवश्यक जरूर हुआ।
अधर्म पर चलने वाले 
अपने बेटे को भी 
मार दे ऐसी माँये पलती है यहां।
धर्म की रक्षा के लिए 
पति का भी साथ छोड़ दें 
ऐसी पत्नीया होती है यहां ।
अपनी आहुति दे दे 
भाई को सन्मार्गपर लाने के लिए 
ऐसे भाई रहते हैं यहां ।
यही इतिहास मार्गदर्शक है 
यही संस्कार आवश्यक है।

हमारे इतिहास को पूछे गये है कई प्रश्न ...
क्या हम आज इस वर्तमान को
प्रश्न पूछ नहीं सकते?
गाजा के बेकसूर जनता से
हमदर्दी रखते हैं मगर...
आज तो हम इजरायल के साथ है।
आज तो हम इजरायल के साथ हैं।


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