बहना

बहना...
एक खूबसूरतसा गहना
कुछ समय पहनना और खूब संभालकर रखना।

सोने का गहना जिसमे हिरे मोती जडे हो
केवल तन को सजाते है ।
पर बहना तेरा क्या कहना!
तू मन को सजाती है।

तू मन को सजाती
तू घर आंगण को सजाती है।
तू पुरुषार्थ को सजाती
जीवन के हर क्षण को सजाती है।

बाजार में खरीदते जब कोई गहना 
तो उसका मूल्य कुछ रुपये मे चुकाते है।
पर जब वह  घर ले आते है
तो वो अमूल्य बन जाता है।

बहना भी एक इंसान साधारणसी 
पर जब हम भाई बन जाते है तो 
हमारे लिए वही बहना
बन जाती है अनन्यसाधारणसी।
 
चमक जिसकी सदा बनी रहे
वह है असली गहना 
दमक जिसकी सदा बनी रहे 
वो है असली बहना ।

हर घर आंगन में हो ऐसी बहना
हर मन मे हो हर एक बहना
दुवा हमारी दिल की
तुम सदा खुश रहना तुम सदा खुश रहना।

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