5ऑगस्ट

5 ऑगस्ट 
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आज  मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम के मंदिर का अयोध्या में शिलान्यास हो रहा है l श्रीराम की कथा से उनके  आदर्शों का हमें ज्ञान हो जाता है l उन आदर्शों का पालन अगर हम अपने  व्यक्तिगत जीवन में करते हैं, तो शांति का अनुभव  कर सकते हैं l अपने कर्तव्यों का निर्वहन अधिक सहज और सुचारू रूप से कर सकते है l इससे एक खुशहाल दुनिया बन सकती है l  एक राजा  और योद्धा के रूप में भी  उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं l श्री राम के संबंध में जितना भी साहित्य उपलब्ध हैं उनसे यह उजागर होता है l एक विशेषता यह भी है कि भारत के सभी संप्रदायों में,  प्रदेशों में,  भाषाओं में श्री राम के संबंध में साहित्य उपलब्ध है l  भारत के बाहर भी कई देशों में श्री राम के संबंध में संदर्भ मिलते हैं l इसलिए  यह संपूर्ण दुनिया के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण है l हमें जिनका स्मरण करना चाहिए उनका कोई स्मारक हो इसमें क्या गलत है?जिस संस्कृति का ताना-बाना इन्ही आदर्शों पर बना हुआ है l  तो इस संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के अंदर यह स्मारक हो  यह उतना ही स्वाभाविक है l उस आदर्श पुरुष की जो जन्मस्थली है उसी शहर में यह स्मारक हो यह भी उतना ही स्वाभाविक है l उन आदर्शों को मानने वाले  व्यक्ति जिस भी देश में है, हर उस देश मैं इनका स्मारक बन सकता है l  अतः दुनिया का कोई भी व्यक्ति इन कालजयी और विश्व हितेषी आदर्शों का स्मरण कराने वाले स्मारक का निर्माण हो इसके लिए अवश्य अनुमोदन करेगा चूंकी  यह इतिहास भारत में घटित हुआ भारत के सुपुत्र ओं की यह अधिक जिम्मेदारी हैं l 
       
        मंदिर के निर्माण के लिए जो आंदोलन चला , उसका अंत जिस तरह से हुआ उसमें पूरी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ l सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया,  निर्णय देने वाले उस खंडपीठ में 5 लोग रहे l उसमें  दोनों पार्श्वभूमी से आने वाले लोग भी रहे l  फिर भी एकमत से निर्णय हुआ पूरे देश में अत्यंत तक संयम शांति और उदारता पूर्वक स्वीकार किया यह देश यहां के लोग यहां के लोगों का मन मोहा भगवान राम के आदर्शों के अनुरूप है l आज का दिन देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए हर्ष और आनंद का दिन

        मर्यादा  पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर का निर्माण और उसका  शिलान्यास भारत के रग-रग में बसी  उदारता और लोकशाही के मूल्यों का विजय है lभारत के संविधान का विजय है l  संविधानिक संस्थान के कार्यकुशलता का विजय  हैं l श्रीराम के आदर्शों के प्रभाव का विजय है l  प्रश्न यह उठ सकता है,  यह विजय किसके ऊपर  मानी जा रही है?  कई सालों से भारतीय समाज में  भारत की प्रशासनिक एवं संवैधानिक संस्थाओं में एक  प्रकार का न्यूनगंड  दिखाई देता रहा l उस न्यूनगंड के ऊपर पाई गई यह विजय है l  भारत के हित में हैं,  जो भारत की सभ्यता संस्कृति और परंपरा के अनुरूप हैं, जो भारत के  एकात्मता और अखंडता के लिए सहायक हैं,  विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक है  वह सारी चीजें करने में  जिस आत्मविश्वास की आवश्यकता है वह आत्मविश्वास भारत  मैं है l  एकात्मता की भावना से भरपुर भारतीय समाज अधिक गति से विकास कर सकता है,  एक अनुशासित समाज बन सकता है और अनुशासित समाज ही आने वाली समस्याओं का समाधान आसानी से निकाल सकता है  और उन पर विजय पा सकता है l 
      
        हमे इस उपलक्ष मे श्रीराम का  स्मरण और उनके गुणों का चिंतन करना चाहिए और उनका पालन करने के लिए  पुरुषार्थ करना चाहिए l ऐसा संगठित  और अनुशासित समाज ही सारी दुनिया में  श्रीराम के आदर्शों को ले जाकर दुनिया को भी खुशहाल  बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है l  यही इस मंदिर का प्रयोजन है और यही इस मंदिर से मिलने वाला ही प्रेरणा है l भारत की संस्कृति,  यहां के विचार, काल के अनुसार परिवर्तन के लिए तैयार रहें है l  अतः इस उपलक्ष में इतना ही करना कारगर होगा श्री राम के गुणों का स्मरण करें और उनके पालन का पुरुषार्थ करें l 

    पिछले वर्ष 5 ऑगस्ट के हि दिन भारत के संसद मे जम्मू कश्मीर और लड्डाख  के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर इसी आत्मविश्वास का दर्शन कराया था l5 ऑगस्ट का ये दिन अगले साल क्या रंग लायेगा?.... हम सभी एकात्म भाव से प्रयत्न करते रहे तो 15 ऑगस्ट और 8 ऑगस्ट की तरह 15 ऑगस्ट भी हमे सदैव प्रेरणा देता रहेगा l
 -वैद्य मनोज पाटील, सांगली.

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